भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं ( संरचना ) Features of Indian Economy in Hindi

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं ( संरचना ) Features of Indian Economy in Hindi

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भारत की अर्थव्यवस्था (Economy of India)

भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से दुनिया में सातवें स्थान पर है, आबादी में इसका दूसरा स्थान है और भारत केवल 2.6% क्षेत्र के साथ दुनिया की 14% आबादी को शरण देता है।

1919 से भारत में तेजी से आर्थिक प्रगति हुई है, जब उदारीकरण और आर्थिक सुधारों की नीति लागू की गई है और भारत दुनिया की आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा है। सुधारों से पहले, सरकारी नियंत्रण मुख्य रूप से भारतीय उद्योगों और व्यापार पर हावी था और सुधारों को लागू करने से पहले इसका कड़ा विरोध किया गया था, लेकिन आर्थिक सुधारों के अच्छे परिणामों के कारण, विरोध काफी हद तक कम हो गया है। हालांकि, एक बड़ा वर्ग अभी भी बुनियादी ढांचे में तेज प्रगति की कमी से ना-खुश है और एक बड़ा हिस्सा अभी भी अपने सुधारों से लाभान्वित नहीं हुआ है।

इतिहास

भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के अनुसार, पहली शताब्दी से लेकर दसवीं शताब्दी तक भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। पहली सदी में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दुनिया के कुल जीडीपी का 32.9% था; 2000 में, यह 28.9% था; और 1800 में यह 24.4% था।

ब्रिटिश काल के दौरान, भारत की अर्थव्यवस्था का अत्यधिक शोषण और शोषण किया गया था, जिसके कारण 1947 में, स्वतंत्रता के समय के दौरान, भारतीय अर्थव्यवस्था अपने सुनहरे इतिहास का केवल एक खंडहर बनकर रह गई।

स्वतंत्रता के बाद से, भारत समाजवादी व्यवस्था की ओर बढ़ा है। सार्वजनिक उद्योगों और केंद्रीय योजना को प्रोत्साहित किया गया। यह प्रणाली सोवियत संघ के साथ भारत में बीसवीं सदी के अंत में आई थी। 1991 में, भारत को एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, जिसके कारण भारत को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा। उसके बाद, नरसिम्हा राव की सरकार ने वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के निर्देशन में आर्थिक सुधारों के लिए एक लंबा अभियान शुरू किया, जिसके बाद भारत धीरे-धीरे विदेशी पूंजी निवेश का आकर्षण बन गया और संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया। 1919 से भारतीय अर्थव्यवस्था में समेकन का दौर शुरू हुआ। तब से, भारत ने प्रति वर्ष 8% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। अप्रत्याशित रूप से, वर्ष 2003 में, भारत ने 6.4 प्रतिशत की विकास दर हासिल की, जिसे विश्व अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था का संकेत माना जाता था। यही नहीं, 2005-06 और 2007-08 के बीच लगातार तीन वर्षों तक, 9 प्रतिशत से अधिक की अभूतपूर्व वृद्धि दर हासिल की गई। कुल मिलाकर, भारत की वार्षिक वृद्धि दर 2004-05 से 2011-12 के दौरान 8.3 प्रतिशत रही, लेकिन वैश्विक मंदी के कारण 2012-13 और 2013-14 में यह औसत 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई। लगातार दो वर्षों के लिए 5 प्रतिशत से कम की जीएसडीपी वृद्धि दर 25 साल पहले 1986-87 और 1987-88 में देखी गई थी।

2018 के अनुसार भारत का कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP of India 2018) 2.948 ट्रीलियन डॉलर हो गया है। क्रय मूल्य शक्ति (PPP) के अनुसार भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुसार आज भारत अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन के बाद दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इसमें फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश को पीछे छोड़ दिया है।

विकासशील देशों में भारत सबसे तेजी से विकास कर रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था उभरती हुई अर्थव्यवस्था कही जाती है क्योंकि अभी यहां पर बहुत ही संभावनाएं बाकी हैं। भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को टक्कर देती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं (Features of Indian Economy)

भारत एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है ( India’s mixed economy)

भारत की अर्थव्यवस्था को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है। यहां सार्वजनिक और निजी दोनों ही प्रकार के उद्योग धंधे साथ में काम करते हैं। 1991 में देश में उदारीकरण किया गया है। विदेशी कंपनियों के लिए देश में फ़ैक्टरी, उद्योग, धंधे लगाने का दरवाज़ा खोला गया है।

उसके बाद से देश में निजी सेक्टर बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। कुछ बुनियादी चीजों जैसे रेलवे, हवाई जहाज़, सैन्य हथियारों का निर्माण, रक्षा क्षेत्र से संबंधित उद्योगों में सरकारी सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है।

विदेशी मुद्रा भंडार

मार्च 201 तक भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार  414 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। अमेरिकी डॉलर की कीमत  71 रुपये के स्तर पर पहुंच गई 

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान ( Role of Agriculture in Indian Economy)

भारत की 70% आबादी गांव में निवास करती है जो कृषि का काम करती है। भारत की अर्थव्यवस्था पर कृषि का प्रभाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से पड़ता है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 30% कृषि क्षेत्र से ही प्राप्त होता है। कृषि को देश की रीढ़ भी कहा जाता है। भारत में कृषि के अंतर्गत फल, अनाज, सब्जियों के साथ पशु-पालन के उद्योग धंधे भी आते हैं।

नई अर्थव्यवस्था (कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर असंतुलन)

भारत की अर्थव्यवस्था की बड़ी विशेषता है कि यहां कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर संतुलन देखने को मिलता है।

एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था ( Growing Indian Economy )

भारत की अर्थव्यवस्था को उभरती हुई अर्थव्यवस्था कहते हैं क्योंकि अभी यहां बहुत सारे सेक्टर का विकास होना बाकी है। इसलिए यहां बहुत अधिक संभावनाएं हैं। जबकि विकसित देशों में विकास पूरा हो चुका है और नए विकास की कोई संभावना नहीं है।

2018 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था का सकल घरेलू उत्पाद विकास प्रतिशत (Indian Economy growth rate 2018) 7.3% था। जो विश्व के अन्य देशों की तुलना में काफी अच्छा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में भारत की अर्थव्यवस्था बहुत आगे जाएगी।

भारत की अर्थव्यवस्था में तकनीकी का कम उपयोग

देश की अर्थव्यवस्था में तकनीकी का उपयोग कम मात्रा में हो रहा है। मानव जनित श्रम का इस्तेमाल अधिक हो रहा है जिससे वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है। विश्व की दूसरी विकसित अर्थव्यवस्थाओं जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़-चढ़कर किया जाता है। भारत को यदि विश्व में सर्वोच्च स्थान पाना है तो तकनीकी का उपयोग उद्योग धंधों और कृषि में बढ़ाना होगा।

असमान धन वितरण ( Income inequality in India )

भारत की अर्थव्यवस्था में धन वितरण में असमानता देखने को मिलती है। अमीर और गरीब के बीच बड़ी खाई है। देश में मुट्ठी भर लोगों के पास बड़ी मात्रा में धन है, परंतु बाकी जनता गरीबी की समस्या से जूझ रही है। अमीर लोग और अमीर बनते जा रहे हैं। गरीब और गरीब होता जा रहा है। भारत के 1% जनसंख्या के पास देश का 53% धन है।

बड़ी जनसंख्या ( India’s population )

2018 के अनुसार भारत की आबादी 135 करोड़ से अधिक हो चुकी है। भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां पर बड़ी मात्रा में आबादी है।  जनसंख्या के मामले में भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा देश है। बड़ी मात्रा में लोगों को रोज़गार देना एक बड़ी चुनौती है। बड़ी जनसंख्या के कारण गरीबी में भी बढ़ोतरी हो रही है।

यदि भारत अपने संसाधनों को सही तरह से इस्तेमाल करें तो यह विश्व में महाशक्ति बन सकता है। देश की जनसंख्या की वृद्धि दर india population growth rate 2018 के अनुसार 1.11% है।

स्थिर मैक्रो अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया भर में सबसे स्थिर मैक्रो अर्थव्यवस्था माना जाता है। भारत में कारोबार और व्यापार की अच्छी संभावनाएं हैं जिससे बाहरी देश आकर यहां उद्योग धंधे स्थापित कर रहे हैं।  भारत का सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर ( India GDP growth rate 2018) 7.3% है.

शहरी क्षेत्रों में तेजी से वृद्धि

भारत की अर्थव्यवस्था की बड़ी विशेषता है कि यहां पर शहरी क्षेत्र तेजी से बढ़ रहे हैं जिसके कारण हर साल नए उद्योग धंधे स्थापित हो रहे हैं। विकास को गति मिल रही है।

रोज़गार के अपर्याप्त अवसर ( Unemployment in India )

भारत की अर्थव्यवस्था में बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है। देश में 135 करोड़ की आबादी है जिसमें 60% आबादी युवा है और काम करने के योग्य है। पर इसके बावजूद देश में बड़ी मात्रा में बेरोज़गारी है। 2017 में भारत में बेरोज़गारी (unemployment in india 2017) 1.77 करोड़ थी।

बुनियादी ढांचे का अभाव ( Challenges of infrastructure in India )

भारत की अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे का अभाव है। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से इसमें सुधार किया गया है, पर अभी भी बहुत से क्षेत्रों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है। भारत को यदि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है तो बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। देश के बहुत से हिस्सों में बिजली, पानी, सड़क, सीजर, यातायात के संसाधन, शौचालाय, घर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

मूल्य अस्थिरता ( Inflation in India )

देश में वस्तुओं के मूल्य में अस्थिरता है। आए दिन मूल्य घटता बढ़ता रहता है। मुद्रास्फ़ीति के कारण वस्तुएँ महंगी हो रही है।

तेजी से बढ़ता सेवा क्षेत्र ( Growth of Indian service sector )

भारत में सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। बीपीओ (B.P.O), सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर निर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.7% का योगदान सेवा क्षेत्र का है।

प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है ( Under-utilization of natural resources )

भारत एक विशाल देश है जहां सभी तरह के प्राकृतिक संसाधन जैसे- ज़मीन, पानी, खनिज, वन, पेट्रोल, पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। पर इन सभी संसाधनों का सही तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया है।

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